क्या आपकी मन्त्र-साधना जागृत नहीं लगती?क्या आपकी साधना, वर्षों के जप-प्रयास के बावजूद, सिर्फ शब्दों की यान्त्रिक क्रिया मात्र बनकर रह गई लगती है? क्या आप अभी उस दिव्य-संवाद की साक्षात् अनुभूति प्राप्त नहीं कर सके हैं, जिसका वर्णन हमारे शास्त्रों में मिलता है? यदि आपका उत्तर ‘हाँ’ है, तो पहले यह समझें कि अकेले नहीं हैं।…